सआदत हसन मंटो की एक रचना, "गुजरात के शाह दौले का चूहा "


By - राजीव मित्तल


फ़ोटो - गूगल 


उसकी सहेली काफी दिन बाद उससे मिलने आई..हैरत की बात यह कि उसकी गोद में बच्चा भी था..

-यह लड़का कैसे पैदा हो गया..

शाह दौले साहब की बरकत है..एक औरत ने सुझाया था कि अगर औलाद चाहती है तो गुजरात जा कर शाह साहब की मज़ार पर मन्नत मानो और कहो कि हुज़ूर, जो पहला बच्चा होगा, वह आपको चढ़ावा..

सहेली ने यह भी बताया कि इस मन्नत से जो पहला बच्चा पैदा होता है, उसका सिर बहुत ही छोटा होता है..और उसे मज़ार पर ही छोड़ कर आना पड़ता है..

सहेली की बातों में आ कर वो गुजरात की उस मज़ार पर गयी और मनौती मांगी..दो माह बाद बच्चे के आसार प्रकट भए.. लड़का हुआ..शाह साहब की कृपा से हुआ था..दिल पे पत्थर रख वो उसे मज़ार पे रख आई..

घर आ कर वो इतना रोई कि बीमार पड़ गयी..उसको अपना बच्चा भूलता ही न था..अजीब से ख़्वाब देखती कि शाह का छोटे सिर वाला चूहा बिल के अंदर दाखिल हो रहा है..वह उसकी दुम खींच रही है..

उसे हर जगह चूहे नज़र आते..कई बार तो वो खुद को चुहिया समझ बैठती..एक दिन वो गुजरात जा पहुंची और मज़ार पर रुक कर बच्चे की पूछताछ करती रही..लेकिन वो नहीं मिला..आखिरकार वो घर लौट आयी और सामान्य जीवन जीने लगी..उसके तीन और बच्चे हुए..बड़े हुए..

एक दिन तीनों स्कूल से भागे भागे आये--अम्मी हम तमाशा देखेंगे...एक आदमी दिखा रहा है..सब घर से बाहर आ गए..

बच्चों की मां ने देखा कि चूहानुमा लड़का अजीब सी हरकतें कर रहा है..बच्चों की मां ने नज़दीक जा कर देखा तो स्तब्ध रह गई.. उस बड़े से चूहे के गाल पे वही निशान, जो उसके मज़ार पे छोड़े गए बेटे के गाल पे था..

मां के बगल में खड़ी बड़ी बेटी ने पूछा--अम्मी इसकी शक्ल तो मुझसे मिल रही है..







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