जुनून प्यार का ऐसा चढ़ा की मौत को गले लगा लिया, पर कई लोगो को जीवनदान दे गया।



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अतुल लोखंडे एक ऐसा शख्स जो प्यार में ग़ालिब भी बना और दुनिया से जाते - जाते पाँच लोगों को जीवन देता गया।

अतुल भजपा के युवा मोर्चा नेता थे। जिन्होंने खुद को अपनी प्रेमिका के सामने गोली मार ली। जिसके बाद अस्पताल में अतुल का इलाज चला लेकिन अंत में डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। 

दसअसल अतुल एक लड़की से बहुत प्यार करता और वो दोनों लगभग 10 सालों से साथ में थे। लेकिन कुछ विवाद होने की वजह से उनमें झगड़ा हो गया और राहुल ने खुद के सिर में गोली मार ली।

मरने से पहले अतुल ने फेसबुक पर एक स्टेटस डाला था जिसमे उसने लिखा था कि वो मरने के बाद भी जिंदा रहना चाहता हैं। ये बात भले ही उसने अनजाने में लिखी हो पर लेकिन उसकी ये बात सच हो गयी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत करते वक़्त अतुल की माँ सुनंदा लोखंडे ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की आखिरी इच्छा को पूरा करते हुए उसके अंग को दान करने का निर्णय लिया हैं।

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अतुल लोखंडे के दिल से दिल्ली एम्स में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे एक मरीज को शुक्रवार सुबह नया जीवन मिल गया। वहीं उसकी एक किडनी चिरायु व दूसरी सिद्धांता अस्पताल में भर्ती मरीज को ट्रांसप्लांट की गई। लिवर बंसल अस्पताल में भर्ती मरीज को लगाया गया। जबकि आंखें हमीदिया अस्पताल को दान की गई। इस तरह अतुल के अंगों से कुल छह मरीजों को नया जीवन मिला।

हालांकि डॉक्टरों को फ्लाइट नहीं मिलने के कारण अतुल के फेफड़े दान नहीं हो सके। इस कारण चेन्न्ई के फोर्टिश अस्पताल में फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीज और उसके परिजन को निराशा हाथ लगी। बंसल अस्पताल में अंगों को निकालने व दान करने की प्रक्रिया शुक्रवार तड़के 3 बजे से शुरू हुई।

हार्ट को अस्पताल से एयरपोर्ट तक भेजने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। बता दें कि मप्र के भोपाल में अतुल लोखंडे भाजयुमो नेता थे, जिन्होंने प्रमिका के घर जाकर मंगलवार रात खुद को गोली मार ली थी। गुरुवार देर रात डॉक्टरों की टीम ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया था।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों की एक टीम रात में ही सीनियर कार्डियो लॉजिस्ट डॉ. चंद्रशेखर के नेतृत्व में भोपाल पहुंच गई थी। टीम ने शुक्रवार तड़के 3 बजे से अतुल के शरीर से अंगों को निकालने की प्रक्रिया शुरू की। सुबह 6 बजे तक हार्ट को छोड़कर बाकी के अंग निकाले गए। इसके बाद हार्ट निकाला गया, जिसे सुबह 6.21 बजे एयरपोर्ट के लिए रवाना किया। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। एयरपोर्ट से सुबह 7.20 बजे के करीब डॉक्टरों की टीम फ्लाइट से हार्ट को लेकर दिल्ली रवाना हो गई।


इसके बाद किडनी एक किडनी सिद्धांता, दूसरी चिरायु अस्पताल भेजी गई। जहां पर मरीजों को ट्रांसप्लांट की गई। लिवर का ट्रांसप्लांट बंसल अस्पताल में ही हुआ। हमीदिया अस्पताल में अतुल के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद आंखें भी दान कर दी गईं। 

तय समय पर दिल्ली नहीं पहुंच पाता हार्ट, इसलिए नहीं निकाले फेफड़े 

अतुल के एपनिया टेस्ट (ब्रेन डेड से जुड़ी) रिपोर्ट रात 12.07 मिनट पर आई। तब तक हार्ट निकालने वाली दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम भोपाल के लिए रवाना हो चुकी थी। फेफड़े निकालने वाली टीम चेन्न्ई से आनी थी जो शुक्रवार सुबह 8 बजे के करीब भोपाल पहुंचने वाली थी।

भोपाल आर्गन डोनेशन सोसायटी के काउंसलर सुनील राय ने बताया कि इस तरह भोपाल से हार्ट लेकर दिल्ली जाने वाली फ्लाइट सुबह 7.20 बजे के करीब थी। इसके बाद दूसरी फ्लाइट के लिए काफी इंतजार करना पड़ता, जो कि संभव नहीं था। इसके चलते तय किया गया फेफड़े न निकालकर हार्ट ही निकाला जाएगा।

सुनंदा लोखंडे बताया कि जब उन्हें अपने बेटे की मौत की खबर मिली तो वो एकदम टूट गयी थी। लेकिन बाद में जब उन्होंने अपने बेटे के फेसबुक पोस्ट को ध्यान से पढ़ा तो उन्होंने उसका अंग दान करने का फैसला लिया।








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