अगस्त क्रांति , 1942 में हुई थी और एक अन्य अगस्त क्रांति करने का दावा मोदी जी कर रहे हैं।


By - अंकेश मध्देशिया


फ़ोटो - द वायर 


भारतीय जनता पार्टी को यह भ्रम हो गया है कि नाम बदलकर बदलकर वह इतिहास बदल सकती है. ताजा मामला पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने का है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसे अगस्त क्रांति की संज्ञा दी गई है। पर क्या अगस्त में घटित होने से ही इसे अगस्त क्रांति कहा जा सकता है। 

अगस्त क्रांति में भारतीयों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी थी करेंगे या मरेंगे की भावना के साथ। 

सभी राष्ट्रीय नेताओं को पहले ही जेल में डाल दिया गया था जिस कारण से अपेक्षाकृत युवा नेताओं  डॉ०राममनोहर लोहिया ,जयप्रकाश नारायण अरुणा आसफ अली एवम् अन्य समाजवादी और कांग्रेसी नेताओं ने भूमिगत रहते हुए संघर्ष चलाया. क्या इस घटना की तुलना सरकार द्वारा एक बिल पारित कराने से की जा सकती है ? क्या मोदी जी सरकार में रहते हुए क्रांति करने की अपनी हसरत पूरी कर सकते हैं  ? 

नाम बदलने का ऐसा ही हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण प्रयास जीएसटी बिल पारित कराने के बाद इसे आर्थिक आज़ादी लाने वाला ऐतिहासिक कदम बताना। जी.एस.टी से कौन सी आर्थिक आजादी आयी है, यह तो मोदी जी ही बता पायेंगे ?

नाम पर चलने वाली इस सियासत में मोदी जी का सबसे प्रमुख आरोप यह है कि एक परिवार के लिए, देश के अन्य महापुरुषों की उपेक्षा की गई इसलिए मोदी जी ने इन उपेक्षित महापुरुषों का उद्धार करना शुरू किया। मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया। 

पर 5 साल से लगातार बोलते हुए भी वह देश को यह नहीं बता पाए कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ,जैसे महापुरुषों ने देश के लिए क्या किया है।

नाम बदलने कि यह धूर्तता केवल जगहों का नाम बदलने तक ही सीमित नहीं है। कभी वह गांधी और जयप्रकाश के नामों के साथ दीनदयाल का नाम जोडकर उनका कद बढाने की कोशिश करते हैं तो कभी जयप्रकाश और लोहिया के नामों के साथ नानाजी देशमुख का नाम जोडकर उनको पहचान दिलाने की कोशिश करते हैं।

प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी मोदी जी की दिखाई राह पर चल रहे हैं। उन्होंने अर्ध्दकुम्भ का नाम बदलकर कुंभ कर दिया। इससे सबसे बड़ी उपलब्धि यह हुई कि 12 साल में लगने वाला कुंभ अब 6 साल में लग जाएगा। कुंभ के मद्देनजर ही इलाहाबाद का नाम बदलकर तीर्थराज प्रयाग किया जाना है।

ऐसा लग रहा है कि नाम बदल देने से ही प्रदेश की सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में चल रहे हैं बालिका संरक्षण गृहों में लड़कियों के यौन शोषण और दुराचार की खबरें आ रही हैं । पर इन पापों को दूर करने के बजाय नाम बदलकर प्रदेश को पुण्यभूमि बनाने का प्रयास जारी हैं। 
भाजपा द्वारा नाम बदलने की सियासत नयी नहीं है पर नाम बदलने से उसका इतिहास नहीं बदल जाने वाला। मोदी जी भले ही अपने आप को गरीबों के दुखों का भागीदार बताएं पर उनकी नीतियां तो अंबानियों और अडानियों के हितों को पूरा करने वाली ही है।




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