आज़ादी के 72 साल बाद इस गांव में बिजली के नाम पर पहुँचा बिजली बिल।






आज़ाद भारत आज अपना 72 वा स्वंत्रता दिवस मना रहा हैं। भारत ने अब तक अपनी उपस्थिति विश्व के हर कोने में दर्ज करायी हैं। अगर आप भारत के शहरों में घूमोगे तो आपको शहरों की चकाचौंध देखकर लगेगा कि भारत ने सच में विकास कर लिया हैं और तब आप सोचेंगे की इस देश में पल रहे राजनेताओं ने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया हैं। लेकिन इस गांव में जो हुआ इसे जानकर आप भ्रम से बाहर आ जायेंगे।

मामला उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में पड़ने वाले कजराह गांव का हैं। वैसे तो कुशीनगर को बौद्ध धर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण जगह माना जाता हैं। लेकिन यहाँ का बिजली विभाग बौद्ध के मार्गो पर नहीं चलता हैं।

दरअसल कजराह गांव  में बिजली का कनेक्शन नहीं हैं। न जाने कितने सालों से इस गांव के लोग बिना बिजली के रह रहे थे। किसी तरह हाथ - पैर मारने के बाद गांव में भारत सरकार के सौभाग्य योजना के तहत बिजली पहुँच गयी। विद्युत विभाग ने गांव में बिजली के खंभे लगवा दिए जिसके बाद गांव वालों को लगा कि अभी जल्द ही इन सारे खम्बों में तार भी जोड़ दिये जायेंगे जिसके बाद गांव के हर घर में उजियारा होगा। लेकिन गाँववालों की उम्मीद धरी की धरी रह गयी। काफी वक्त बीत गया लेकिन बिजली के खम्बों में किसी भी तरह का कोई तार नहीं जोड़े गये। 

गांववालों को लगा की सरकारी काम हैं हो सकता हैं समय लगे अब ख़म्बे लग गये हैं तो तार भी बिछी जायेगी। पर गाँव वालों की ये आशा भी टूट गयी जब तीन महीने बाद गांव के 60 घरों में बिजली विभाग द्वारा 955 रुपये का बिजली बिल भेजा गया। खैर ये मामला ज्यादार देर तक दबा नहीं रहा और लोकल मीडिया ने इसे ब्रेकिंग न्यूज़ बना कर चलना शुरू कर दिया। जिसके बाद जिलाधिकारी अनिल कुमार सिंह ने स्थिति को संभालते हुए बिजली विभाग को ये गलती सुधारने को कहा और साथ ही ये भी कहा कि गांव में जल्द से जल्द बिजली पहुँच जायेगी।













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