इंटर्नशिप करनेवालों को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए, उनका ही हॉरर है इसमें



पिछले कुछ दिनों से बेहतरीन हॉरर फिल्मों की तलाश में इंटरनेट पर बहुत भटका. सारी फिल्मों में वही भूत मिले, चेहरे पर आटा लगाये हुए.

पर एक फिल्म मिली, जिसका हॉरर अलग था. सुपरनैचुरल बनने की कोशिश तो इन्होंने भी की, पर भूत-वूत इनका काम नहीं आया. काम आया सब्जेक्ट मैटर. ऑफिस की पॉलिटिक्स पर ये हॉरर फिल्म बनी थी. जिसमें ऑफिस की पॉलिटिक्स इतनी हावी हो जाती है कि भूत कहीं पीछे छूट जाता है. इतना कि उसका करैक्टर भी फिल्म में डेवेलप नहीं हो पाता है. ऑफिस पॉलिटिक्स के जानकारों को ये फिल्म सही लगेगी.

- फ़िल्म का पोस्टर 


हथौड़े से होती हैं जघन्य हत्यायें


फिल्म की शुरुआत खौफनाक है. ली ऑफिस से थका-हारा घर लौटता है. घर में उसकी मां हैं, बीवी है और बच्चा है. बच्चे के पैर में कोई गंभीर बीमारी है, वो घिसट के चलता है. ली को देखकर मां और बच्चा सिर हिलाते हैं और अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं. ली पल भर के भकुआया देखता है कि कोई बोल क्यों नहीं रहा. तभी समझ आ जाता है कि ये कुछ करेगा. जिस हिसाब से कैमरा उसके निरीह चेहरे पर टिकता है, निरीहता ही खौफनाक लगने लगती है.

हालांकि बीवी कहती है कि कपड़े बदल लो, खा लो. पर वो अंदर से एक हथौड़ा ले के लौटता है. बीवी कुछ देर उसे देखती है. पता चल जाता है कि वो मारेगा. बीवी को मारता है तो किसी की चूं नहीं निकलती.


- हत्या के क्रम में ली, यहीं पर पत्नी देख रही होती है

बच्चे को मारना अच्छा नहीं लगा. फिल्म देखने के बहुत देर बाद तक दिमाग में चलता रहा. अक्सर हम अखबारों में इस तरह की खबरें पढ़ते हैं, जिनमें मां-बाप बच्चों की जान ले लेते हैं. ये कभी भी जस्टिफाई नहीं हो पाता. बाद में पता चलता है कि उसने बीवी के सिर के पांच टुकड़े किये थे. बच्चे की जांघ की हड्डी तोड़ दी थी. मां का स्पाइनल कॉर्ड, वो हार्ट अटैक से मरीं. हथौड़े से इतना कांड करने के लिए बहुत ज्यादा निराशा और नफरत से उपजी हुई ताकत चाहिए. यहां प्रयोग किया गया हथौड़ा छोटा सा ही है.

मिलते हैं दुनिया के सबसे इडियट पुलिस ऑफिसर से

अब हमारी मुलाकात होती है दुनिया के सबसे फद्दू पुलिस ऑफिसर्स से, जो पता लगा लेते हैं कि हत्यायें करने के बाद ली अपने ऑफिस ही गया था, पर किसी सीसीटीवी कैमरे में वापस आता नहीं दिखा. इसके बाद पुलिस घर चली जाती है. पूरी फिल्म में पुलिस ऑफिस की बिल्डिंग में ली को नहीं खोजती है. बाहर बाहर घूमकर, सीरियस होकर सबको देखकर, चले जाते हैं.


- इतिहास के महानतम पुलिस ऑफिसर

अगले दिन ऑफिस में सबसे पूछ-ताछ होती है. ऑफिसर को अंदाजा लग जाता है कि ऑफिस में ली की कोई बहुत ज्यादा इज्जत नहीं थी. क्योंकि सब यही कहते हैं कि वो बड़ा अच्छा आदमी था, एक मच्छर भी नहीं मार सकता था. ली के विवाहेत्तर संबंध के प्रश्न पर एक लड़की ऐसे मुस्कुराती है कि ली से कौन करेगा. इयू यक्क. बाहर निकलते निकलते ऑफिसर को एक इंटर्न दिख जाती है, जिससे उसकी बात नहीं हो पाई होती है. इंटर्न की डेस्क ली की डेस्क के पास ही होती है. शुरुआत में ना कहने के बाद वो बताती है कि ली से उसकी बात होती थी.

फिर आती है रहस्यमयी इंटर्न

अब यहां से इंटर्न की कहानी शुरू होती है. इंटर्न को पैसे की कमी है, इसलिए वो ऑफिस से दूर रहती है. ऑफिस में वो सबको प्रसन्न रखने का प्रयास करती है, इसलिए सारे काम फटाफट कर देती है. किसी काम को ना नहीं कहती है. सबसे सहम के गुड मॉर्निंग करती है. पर इसी वजह से ऑफिस के लोग उससे खफा रहते हैं. आपस में कहते हैं कि कुछ ज्यादा ही पवित्र बन रही है ये. वो धीरे से ये बात सुन लेती है और बाथरूम में जा के रोती है.

पर उसे नौकरी चाहिए तो वो एच आर हेड से मिलती है. वो कहता है कि चिंता मत करो, इतने दिन से काम कर रही हो, तुम्हें ही फुल टाइम नौकरी मिलेगी.

- इंटर्न
इंटर्न की परेशानी की वजह एक नई इंटर्न होती है, जो ज्यादा गोरी, सुंदर, हंसमुख, डिग्रीवाली और रास्ते में चलते चलते गुलदस्ता बनानेवाली होती है. लोगों की बातों का जवाब वो हंसने से पहले थोड़ा टेढ़ा होकर, बालों को झटककर आंखों में देखते हुए देती है. साथ ही सामने वाले की प्रतिक्रिया का इंतजार भी उसकी आंखों में देखते हुए ही करती है. हालांकि उसको आए कुछ ही दिन हुए हैं, उसने ज्यादा काम भी नहीं किया है, पर सब उसे टीम में रखना चाहते हैं.

ऑफिस की पॉलिटिक्स

नई इंटर्न और पुरानी इंटर्न की प्रतिद्वंद्विता बहुत खूबसूरती से फिल्माई गई है. जो डॉमिनेट कर रही है, वो बाहर जाने, साथ रुकने, बाहर खाने पर जोर देती है. हंसकर आंखों में देखते हुए. दबनेवाली इंटर्न रुखाई से मना करने की कोशिश करती है और वो खुद की पोजिशन और कमजोर करती है. डॉमिनेट करनेवाली इसको भी हंस के ही लेती है. पुरानी इंटर्न को उसके साथी कर्मचारी हड़का देते हैं. उसकी सीनियर तो ये भी कह देती है कि इतने दिन तक कोई इंटर्न नहीं रहता.

- ऑफिस के लोग 

पुरानी इंटर्न को इससे खतरा पैदा हो जाता है. वो रात को देर तक रुककर काम करने लगती है. उसकी सीनियर ऑफिसर उससे वही काम करवाती है, जो खुद करती है. इंटर्न और सीनियर ऑफिसर्स के काम में कोई अंतर नहीं होता. अंतर बस इतना ही है कि सीनियर उसे धमका सकते हैं, वो नहीं धमका सकती.
ये बात एक मीटिंग में स्थापित होती है. सबका बॉस मीटिंग लेता है और सबको धमकाता है. बुरी तरह जलील करता है. कहता है कि रविवार को इधर उधर क्यों घूम रहे हो, समझ नहीं आता. एक छोटा सा काम तो कर ही सकते थे. एक बार और धमकाने पर इंटर्न की सीनियर नौकरी छोड़ देती है.

अब फिर होती हैं हत्यायें

इसके बाद एक और मीटिंग होती है जिसमें सीनियर के ऊपर सीलिंग से टप टप कर के खून टपकता है. और सबके बॉस के नायब की लाश झूलती हुई सीलिंग से निकलती है. सबके होश फाख्ता हो जाते हैं. सबको यही लगता है कि ली ही ये हत्यायें कर रहा है. तब जा के पता चलता है कि जिस दिन ली ने अपने परिवार की हत्या की, उस दिन बॉस ने ली को नौकरी से निकाल दिया था. ये भी पता चलता है कि मेहनती और शांत होने के बावजूद ली को कोई पसंद नहीं करता. क्योंकि ली को इस बात से मतलब नहीं था कि बॉस को क्या पसंद है. उसे बस काम करने से मतलब था. उसे ये भी नहीं मतलब था कि बाकी कर्मचारी क्या कह रहे हैं.

- ली की दुर्दशा, जो हत्याओं का कारण बनती है

इससे इस बात की शिनाख्त होती है कि ली और इंटर्न दोनों को ही ऑफिस के शक्तिशाली ग्रुप में जगह नहीं मिली थी. वो चाह के भी इनर सर्कल में नहीं आ पाये थे.
पुलिस फिर भागी आती है, कहती है कि ली इसी बिल्डिंग में है, फिर चली जाती है. इसके बाद इंटर्न की सीनियर की हत्या होती है. उसको सुपरबॉस के फोन से सॉरी का मैसेज आता है और उसे ऑफिस फिर से बुलाया जाता है. जब वो वॉशरूम में जाती है, तो बाहर से कोई दरवाजा खटखटाता है. दरवाजा खोलती है तो उसे ली दिखता है. पर तुरंत ही पता चलता है कि ली दिख रहा है, पर उस पर हो रहे चाकू के वार इंटर्न के हैं. इंटर्न उसे गोद देती है.

यहां पर एक कन्फ्यूजन हुआ. मैसेज करने से पहले बॉस को सीढ़ियों पर किसी ने घेरा था. संभवतः वो ली था. बॉस चिल्लाता चिल्लाता भाग रहा था.

इंटर्न को मिल जाती है नई नौकरी, हत्याओं से मुक्त भी हो जाती है

इसके बाद फिर पुलिस आती है और पता कर लेती है कि ली की लाश एक इलेक्ट्रिकल कमरे में मिली है. उसके शरीर से सायनाइड जहर मिलता है. संभवतः उसने परिवार की हत्या करने के बाद ऑफिस आकर जहर खा लिया था और उस कमरे में खुद को बंद कर लिया था. तो बाकी लोगों को ली दिखता कैसे है? यहां पर पता चलता है कि ली का भूत संभवतया दिख रहा है, पर हत्यायें तो इंटर्न ही कर रही है. नायब की लाश जिस सीलिंग से लटकी मिलती है, उस सीलिंग को इंटर्न एक सीन में बैठी देख भी रही होती है.

फिर इंटर्न की एक और सीनियर उसे रात तक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करते देख लेती है, जो सीनियर करते हैं. वो इतना नाराज होती है कि अपशब्द बोलने के बाद थप्पड़ भी मार देती है इंटर्न को. बदले में इंटर्न उसे घसीट घसीट कर मार डालती है. फिर घटनाओं का सीन कुछ यूं बनता है कि इंटर्न बच जाती है और इस सीनियर का बॉयफ्रेंड ही हत्यारा घोषित हो जाता है. ये उसके फिंगरप्रिंट हर जगह चस्पां होते देख समझ आ गया था कि ये गया.

तो भूत का कुछ पता नहीं चलता. पर ये जरूर समझ आता है कि ली और इंटर्न दोनों के प्रति ऑफिस का व्यवहार एक जैसा था. मजाक उड़ाना और गंभीरता से ना लेना. उनके काम को भी दरकिनार करना. ली के पास एक बड़ा सा चाकू हुआ करता था, जो उसके एक कस्टमर ने सुसाइड करने से पहले उसे भेजा था. ली अगर उस दिन काम कर देता तो कस्टमर मरता नहीं. इसका अफसोस को वो चाकू को देखकर मिटाता था. यही चाकू उसने इंटर्न को दे दिया था. इंटर्न को उसकी पड़ोसी ने चाकू के साथ ध्यानमग्न अवस्था में देखा था. ये बात पुलिस ऑफिसर ही पता लगाता है. लेकिन हमेशा की तरह पता लगाकर चुप बैठ जाता है, कुछ नहीं करता. और तो और, उसको नौकरी भी दिला देता है. आखिरी सीन में इंटर्न को पुलिस ऑफिसर के ही ऑफिस में नौकरी का इंटरव्यू कॉल आ जाता है.

इंटर्न्स को ये फिल्म पसंद आ सकती है. बॉसेज को नहीं आएगी, क्योंकि उनको डर और पछतावा दोनों हो सकता है. हालांकि इसकी कम संभावना है.







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