हर लड़की में एक प्रेमिका होती है जो प्रेम में डूब जाना चाहती है।





Photo - google 


कैप्टन विक्रम बत्रा की लव स्टोरी


The Quint ने (2016 में) कैप्टन विक्रम बत्रा पर एक बहुत अच्छी स्टोरी की है। 9 सितम्बर को कारगिल में शहीद हुए उस हीरो का जन्मदिन था। वो हीरो किसी का सबकुछ था। उनकी प्रेमिका ने 4 साल के उस रिलेशनशिप (रिश्ते) को जैसे बयां किया है, उसके 17 साल बाद भी वो कैसा महसूस करती होंगी इसकी कल्पना करते हुए मैं रो पड़ी थी।

सन् 1995 में दोनों ने पंजाब युनिवर्सिटी में एम.ए. इंग्लिश में दाखिला लिया पर दोनों में से कोई भी ये परास्नातक कोर्स पूरा न कर सका। विक्रम की प्रेमिका डिंपल चीमा कहती हैं कि शायद किस्मत ने दोनों को मिलाने के लिए ही उस युनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए भेजा था। उन्हें अब भी याद है विक्रम ने कितनी ख़ुशी, कितने उत्साह के साथ बताया था कि उनका IMA मतलब इंडियन मिलिट्री एकैडमी में चयन हो गया है। इस बात के बाद उनके रिश्ते पर मुहर लग गई। वैसे भी हमारे यहां बहुत सारे रिश्ते इसी करियर के ऊहापोह में बिखर जाते हैं।

जब विक्रम जॉइनिंग के लिए चले गए तो ये दोनों साथ में काफ़ी कम वक़्त बिता पाते थे। डिंपल के यहां शादी की बातें शुरू हो चली थीं। उन्होंने जब बत्रा को इस बारे में बताया तो वे समझाते हुए बोले कि - इस बात का ख़्याल रखो कि तुम्हें क्या पसंद है नहीं तो तुम्हें वही पसंद करना होगा जो तुम्हें मिलेगा।


दोनों मनसा देवी के मंदिर और गुरुद्वारा श्री नाडा साहिब जाते थे। एक बार जब ये दोनों मंदिर की परिक्रमा कर रहे थे तब चौथी परिक्रमा के बाद विक्रम ने कहा - Congratulations Mrs. Batra! डिंपल ने मुड़ कर देखा तो पाया कि विक्रम उनका दुपट्टा पकड़े हुए थे।


ऐसे ही एक बार जब डिंपल पर शादी करने का बहुत दबाव बनने लगा और वो इस रिश्ते को लेकर थोड़ी इनसेक्योर हो गयीं तो विक्रम पर झुंझला उठीं। विक्रम ने अपने वॉलेट से ब्लेड निकाली, अंगूठा काटा और डिंपल की मांग भर दी। उसके बाद डिंपल बहुत समय तक विक्रम का यह कहकर मज़ाक बनाती रहीं कि वो पूरे फ़िल्मी हैं।

आज 17 वर्ष बाद उनके पास यही यादें हैं जिन्हें जीकर वो आगे बढ़ रही हैं। ये तय हो चुका था कि विक्रम के कारगिल से लौटने पर दोनों शादी कर लेंगे पर विक्रम तिरंगे में लिपटकर वापस आए। मैं जितनी बार ये सबकुछ सोच रही हूं, समझने की कोशिश कर रही हूं उतनी बार गला फाड़कर रोने का मन कर रहा है। क्या बीती होगी उस प्रेमिका पर जिसके पास अब वायदों और यादों के सिवा कुछ भी नहीं है।

विक्रम के बारे में बताते हुए डिंपल कहती हैं कि वे बहुत ही बेचैन इंसान थे। दोनों रेस्त्रां में जाते तो जबतक प्लेस किया हुआ ऑर्डर टेबल पर आ नहीं जाता तबतक वो गाड़ी की चाबी से टेबल पर ठक-ठक करते रहते। जब इसके लिए वो मना करतीं तो चाबी रखकर उंगलियों से ठक-ठक शुरू कर देते। वो फिर समझातीं कि ऐसा नहीं करते हैं तो वे पैर हिलाना शुरू कर देते। इसके बाद जब घूरते हुए डिंपल उन्हें रोकतीं तो उनके पास कोई काम न बचता इसलिए वे पानी पीना शुरू कर देते और पानी भी ऐसे पीते जैसे वर्षों से प्यासे बैठे हों।

17 साल बाद कोई महिला इन बारीक बातों को याद करके मुस्कुरा रही है, जी रही है। ये अपने आप में ही इंसान को बर्फ़ की तरह जमा देने वाली और पिघला देने वाली बात है। डिंपल ने विक्रम को वहां लड़ते हुए नहीं देखा पर वो उन्हें जितना जानती हैं उसके हिसाब से बतातीं हैं कि विक्रम का ऐसा रिएक्शन रहा होगा। उन्हें हर लम्हे का एहसास है। छोटी-छोटी बातों से हम किसी इंसान को पूरा बुन लेते हैं, उसकी हर बारीकी समझ लेते हैं, उसके बारे में उससे बेहतर जान लेते हैं। उसमें घुल जाते हैं, पता नहीं कैसा अनुभव होता होगा ये!
वो इतने लम्बे वक़्त के बाद भी विक्रम की यादों को संजोए बैठी हैं। हमारे यहां किसी लड़की को किसी से प्रेम हो जाए तो मां-बाप को कोई फ़र्क नहीं पड़ता। उन्हें उसकी शादी जिससे करानी होती है करा ही देते हैं, इस बेकार तर्क के साथ कि वक्त हर ज़ख़्म का मरहम होता है। सब भूल जाएगी।

ऐसी प्रेममयी दुनिया के बारे में सुनकर उसी में डूब जाने को जी चाहता है, पर सभी के हिस्से वो प्रेम नहीं आता। रिलेशनशिप जैसी चीज़ों को प्रेम का नाम मिल जाता है पर उसकी बारीकियों में सब नहीं उतर पाते। डिंपल की कहानी सुनकर-पढ़कर जितनी तक़लीफ़ होती है, मुझे डिंपल उतनी ही ख़ुशनसीब भी लगती हैं। हर लड़की डिज़र्व करती है एक ऐसा प्रेमी जो उसे बहुत-बहुत प्यार करे, उसे समझे। पैसे से इतर अपनी दुनिया में उसे वक़्त दे सके। हर लड़की डिज़र्व करती है एक ऐसा प्रेमी जिसपर वो जी भरकर प्रेम लुटा सके। जिसके कंधे पर सिर रखकर वो सबकुछ भुला सके। इस भागम-भाग भरी दुनिया में जिसका हाथ पकड़कर वो थोड़ा ठहरना चाहे। ऐसा मुकम्मल प्रेम देखकर लगता है कि कोई इतना प्रेम लुटाने वाला हो तो उसकी विधवा बनी रहना भी कितना सुकून देता होगा। उसके नाम पूरी ज़िंदगी गुज़ार देना कितना अच्छा लगता होगा! उसके प्रेम में डूबे रहने का क्या सुखद एहसास होता होगा। सबको ये मुकम्मल प्यार नहीं मिलता है।

हमारे समाज में लोग प्रेम नहीं करते ऐसा नहीं है। पर अरेंज्ड मैरिज फिर भी ज़्यादा हैं क्योंकि लोग प्रेम से ऊपर 'समाज' को चुनते हैं। अंतरजातीय विवाह का तो ख़्याल भी डरावना लगता है। पर क्या अगर कोई इतना प्यार करने वाला हो तो साहस ख़ुद-ब-खु़द नहीं आ जाता? मुझे नहीं पता कि डिंपल कैसी औरत हैं, वो कैसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं पर अगर मैं खु़द को उनकी जगह रखती हूं तो बिल्कुल वैसा ही पाती हूं जैसी वो खु़द हैं। मेरे घर में अंतरजातीय विवाह के नाम पर बवाल हो सकता है पर अगर मेरे साथ ऐसा हुआ होता तो मैं भी मम्मी-डैडी और तथाकथित समाज से ऊपर जाकर ताउम्र उसकी यादों के साथ रहना ही पसंद करती। 

अगर बुनियाद इतनी मज़बूत हो तो साहस खु़द-ब-खु़द आ जाता है। उसके बाद मैं इस बात का इंतज़ार नहीं करती कि मम्मी का क्या जवाब होगा। मैं स्पष्ट कहती कि मैं उससे प्रेम करती हूं। अब किसी और से नहीं कर पाऊंगी। प्रेम आपको ताकत देता है, ऊर्जा देता है। उस वक़्त आपको मां-बाप से लड़ना या उन्हें मनाना नहीं होता। आप इन सूक्ष्म बातों से ऊपर उठ जाते हैं। हर लड़की डिज़र्व करती है प्रेम की वो पराकाष्ठा जिसमें वो बावरी हो जाए। हर लड़की डिज़र्व करती है एक ऐसा प्रेमी जिसके सामने वो अपनी आत्मा निकालकर रख सके।

प्रेम किसकी चाहत नहीं होती? किसकी हसरत नहीं होती? पर सबको इतना मुकम्मल प्रेम नहीं मिलता डिंपल! आप खु़शनसीब हैं। आपने ऐसे साथी के साथ वक्त गुज़ारा है जिसके साथ ज़िंदगी गुल्ज़ार हो जाती। यहां लड़कियां प्रेम में भी समझौते कर लेती हैं और प्रेम से परे अरेज्ड मैरिज में भी। घर-परिवार-समाज के शर्तों पर जीते जीते वो सिर्फ़ स्टैम्प पेपर बनकर रह जाती हैं। 

हर लड़की डरपोक नहीं होती डिंपल! आप भी शायद इतनी बहादुर न होतीं। जिसे प्रेम के रस से सींचा गया हो वो सांसारिक बातों से, बाह्याडंबर से ऊपर उठ जाता है। ये 'रिलेशनशिप' सबके हिस्से आता है, पर अपने बहाव में बहा ले जाने वाला प्रेम सबको नसीब नहीं होता।


आप दोनों के इस सूत्र पर सबकुछ कु़रबान! <3








Nitish KS की वाल से साभार






Comments