#MeeToo की वजह से नेता महिला पत्रकार से अकेले में मिलने से खौफ़ खा रहे है


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#MeeToo में लगातार आ रही शिकायतों के बाद नेता,अभिनेता जनलिस्ट या पुलिसकर्मी सभी में खौफ पैदा हो रहा है

डर से ज्यादा अविश्वास पैदा हो रहा है और महिलाओं से मिलने से पहले हर आदमी अपने आप को पब्लिक जोन में ला रहा है यानी बंद कमरे या केबिन में मिलने की वजह वह सार्वजनिक स्थानों भीड़ भरी जगहों में ही कई और लोगों को बुला ले रहा है ताकि कोई महिला निकल कर उसके खिलाफ मी टू कैंपेन न चला दे।

ताजा उदाहरण महाराष्ट्र के 1 बड़े और कद्दावर नेता का है, नेताजी भी कोई ऐसे वैसे नहीं कम उम्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वाले और देश की राजनीति में पहचान बनाने वाले नेताओं में शुमार हैं।

हाल के राजनीतिक घटना की जानकारी लेने के लिए और सब से अलग न्यूज़ चलाने के लिए एक महिला पत्रकार ने नेता जी से मिलने के लिए उनके केबिन में अपना विजिटिंग कार्ड भिजवाया , शायद नेताजी उन्हें जानते भी रहे होंगे लेकिन हर बार की तरह इस बार नेता जी ने उनसे अकेले मिलने से मना कर दिया और उन्होंने महिला पत्रकार के साथ - साथ बाहर खड़े उन सभी और सुरक्षाकर्मियों को अपने केबिन में आने के लिए कहा और सभी से काफी देर तक न केवल बातचीत की बल्कि उन सभी के साथ चाय की चुस्की अभी ली।
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यही हाल महाराष्ट्र सहित पूरे देश भर के अलग-अलग नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का भी है, अब कोई भी पुलिस अधिकारी हो नेता हो या मंत्री हो, महिला पत्रकार और दूसरी महिलाओ से अकेले मिलने के बजाये अपने केबिन में अपने ऑफिस के दूसरे स्टाफ और महिलाओं को आने के लिए कहते है।

मी टू कैंपेन से जिस तरीके से लड़कियां और महिलाएं सामने आ रही हैं और अपनी शिकायत फेसबुक के माध्यम से कर रही हैं उससे हर आदमी डर गया है और हर आदमी को यह लगने लगा है कि कहीं कोई महिला मी टू कैंपेन के तहत उसे घसीट न ले और समाज के साथ - साथ उसे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़े।

इस कैंपेन का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता जा रहा है अब लोग अपनी पर्सनल दुश्मनी के लिए भी इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। अलग अलग फिल्मी दुनिया और राजनीति से जुड़े लोग इस कैंपेन के बारे में बोलने लगे है। इस कैंपेन से सबसे ज्यादा नुकसान पत्रकारिता क्षेत्र में होगा, जब कोई नेता मंत्री पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी से पत्रकारों से अकेले में नहीं मिलेगा तो पत्रकारों को ब्रेकिंग न्यूज़ या एक्सक्लूसिव न्यूज़ मिलने में काफी दिक्कत होगी।

पत्रकारों की लाइफ में एक्सक्लूसिव खबरों का बहुत बड़ा महत्व होता है लेकिन जिस तरीके का मी टू कैंपेन चलाया जा रहा है उससे कोई भी प्रशासनिक अधिकारी हो या नेता, महिला पत्रकार  से अकेले में मिलकर एक्सक्लूसिव खबर देने से खौफ खा रहे है।

#MeeToo कैंपेन की वजह से अब महिला पत्रकार, राजनेता और अधिकारियों के रिश्तों के बीच विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा होगा। जिस तरीके से महाराष्ट्र में एक नेता ने महिला पत्रकार को अकेले में मिलने से मना कर दिया वही हाल है भ्रमण प्रशासनिक अधिकारी प्रदेशों में भी कर रहे हैं, जरूरत इस बात है कि मीटू कैंपेन के तहत छोटी-छोटी बातों को मीडिया पर ट्रोल कराने के बजाए घटना के समय ही रिजेक्ट किया जाए, जिसे बाद में मी टू कैंपेन चलाने की जरूरत ही ना पड़े।








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