लखनऊ गोलीकांड : जो समाज विवेक तिवारी के लिए एकजुट हुआ क्या फुरकान के लिए होगा


(फोटो में फुरकान की बीवी नसरीन है) 

8 अक्टूबर 2017 को फुरकान के घरवाले उसे अचानक गेट पर देख कर चौंक गए। गांव के एक विवाद के चलते फुरकान ७ साल से जेल में था। माली हालत इतनी ख़राब थी की 7 साल में घर वालों ने सारी कोशिशें कर लीं लेकिन जमानत की रकम और गारंटर का बंदोबस्त नहीं कर पाए। अचानक रिहाई का कारन गांव वालों ने बताया की कुछ दिन पहले गांव में पुलिस आयी थी और पुराने विवाद में सुलह कराके जेल से छुटवाद दिया था।


2 हफ्ते बाद 23 अक्टूबर 2017 को फुरकान का सीधा गोली मार कर एनकाउंटर कर दिया गया।

पुलिस की कहानी ये है की "फुरकान सहारनपुर, शामली और मुजफ्फर नगर की कई डकैतियों में लिप्त था"
फुरकान की बीवी नसरीन के सिर्फ 3 सवाल हैं की, 

1) जो आदमी 7 साल से जेल में था वो डकैतियां कैसे डाल रहा था ?
2) अगर एनकाउंटर ही करना था तो पुलिस ने खुद जेल से छुड़वाया क्यों ?
3) जब एनकाउंटर हुआ तो फ़ुरक़ान की पसलियां क्यों टूटी हुयी थी ?

एनकाउंटर की रात नसरीन, फुरकान को लेकर बड़ौत अपने भाई को देखने गयी थी, नसरीन की तबियत ख़राब थी इसलिए फुरकान सेव लेने गया और सीधा अगले दिन उसके एनकाउंटर की खबर आयी।

इन एनकाउंटर्स की एक खास बात ये है की प्रदेश की हिस्ट्री-शीटर लिस्ट में किसी का नाम नहीं होता है, सभी के एनकाउंटर के बाद पुलिस उन्हें इनामी बदमाश घोषित करती है। ज्यादातर एनकाउंटर्स में अख़बारों में असली फोटो की बजाय कोई पुरानी फोटो छाप दी जाती है।   

नसरीन, कल्पना तिवारी की तरह पढ़ी लिखी नहीं है, पत्रकारिता में उसका पक्ष रखने वाला कोई नहीं है इस लिए उसकी आवाज दब गयी। क्या उसके परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए कोई मुआवजे की मांग उठाएगा ? जो समाज विवेक तिवारी के लिए एकजुट हुआ क्या फुरकान के लिए होगा या मुस्लिम नाम देखकर उनके हाल पे छोड़ दें ?

ये सवाल खुद से जरूर पूछिए।











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