राम के नाम पर राजनीतिक खेल खेलते खेलते अब बीजेपी ने हनुमान का भी बना दिया जाति प्रमाणपत्र




मैंने हनुमान जी से पूछा, अब तो आपकी जाति भी पता चल गई है, फिर क्या इरादा है। कहने लगे इरादा मतलब? मैंने कहा, यही कि जाति की गंगा में आप भी हाथ धो लीजिए। कोटा, परमिट, लाइसेंस, सीट सब मिल जाएगी। वे कहने लगे, मजाक मत करो, मैं तो तुम्हारे चढ़ाए चना-चिरोंजी और नारियल आदि से खुश हूं, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैंने कहा, आपके चाहने से क्या होता है। ये कोई सतयुग थोड़ी है, जो आप अपने मन से बुटी की जगह पूरा पहाड़ उठा लाएंगे। फल समझ कर सूरज खा लेंगे। लोकतंत्र है, मजाक है क्या। वे थोड़ा घबरा गए, पूछने लगे तो फिर होगा क्या। 

मैंने जवाब दिया यही तो बात है कि होगा कुछ नहीं और बाकी भी कुछ नहीं रहेगा। वे बोले, कमाल कर रहे हो यार, सीधे-सीधे बताओ, ये पहेलियां मुझे समझ में नहीं आती। मैंने कहा, देखिए, इस चुनाव में आपकी जाति पता चल गई है। अब आपके नाम पर मोर्चा बनाया जाएगा। उसकी सदस्यता होगी, पदाधिकारी बनेंगे। 

फिर वे गतिविधियां चलाने के लिए समाज से सहयोग लेंगे। चंदे का धंधा शुरू होगा। आपकी जयंती और बाकी महत्वपूर्ण दिन, जैसे सीता खोज दिवस, लंका दहन प्रसंग, मेघनाद मुष्टिका प्रहार पराक्रम, लंकिनी रुधिर प्रवाह स्मृति, विभीषण मिलन संस्मरण, सुग्रीव चेतना जागरण आदि आदि खोजकर पूरा कैलेंडर बनाया जाएगा। 

उनके हिसाब से आयोजन तय किए जाएंगे। हर आयोजन के लिए झंडे, बैनर, होर्डिंग और पोस्टर लगाए जाएंगे। गदा लेकर आपकी तस्वीर के साथ इलाके के सारे गदाधारियों के भी फोटो चमकाए जाएंगे। भोजन-भंडारे और कथा-वार्ता होगी। आपकी महिमा नए सिरे से लिखी जाएगी। आपके पराक्रमों पर बौद्धिक चर्चाएं होंगी। इनमें तर्क दिए जाएंगे हो सकता है कठघरे में श्रीराम भी आएं कि उन्होंने आपका बहुतेरा शोषण किया है। 

प्रथम मुलाकात से ही आप पर अत्याचार किए हैं। आपको दोनों भाइयों को कांधे पर बैठाकर पर्वत पर ले जाना पड़ा। इसके बाद आपको समुद्र पार करने के लिए विवश किया गया। आप सौ योजन का समुद्र अकेले गए और वहां सीता की खोज में महल-महल भटकते रहे। अकेले ही आपको इतने राक्षसों से लोहा लेना पड़ा। राम-रावण युद्ध में जीत का सेहरा रामजी के सिर बिना वजह पहनाया गया, जबकि असली नायक तो आप थे। 

आप न होते तो न मदद के लिए गरुड़ आते और न ही राम-लक्ष्मण नाशपाश से मुक्त होते। लक्ष्मण की तो जान ही गई थी कि अगर आप संजीवनी लेकर नहीं आते। और वह भी देखिए कि कैसा अत्याचार था कि आप बुटी नहीं पहचानते थे, उसके बाद भी आपको वहां भेजा गया। वहां भी राक्षस से सामना करना पड़ा। लौटते में भरत का बाण खाना पड़ा। 

इतने अत्याचार सहने के बाद भी आपको हासिल किया हुआ, वे हीरे-मोती के हार, जिनमें भगवान राम का अक्स तक नहीं था। ये अन्याय आपने किस तरह सहा होगा, आप ही जानते हैं, लेकिन आगे से अब ऐसा न हो पाएगा। अब हमारी बारी है, आपके साथ हुए एक-एक अन्याय का बदला लेंगे। अब ये जितने काम आपसे कराए गए थे, हम उनसे कराकर मानेंगे और आखिर में उन्हें हीरे-मोती के हार भी नहीं देंगे। यही उनकी सजा होगी। 

ये सुनकर हनुमान जी बड़े घबरा गए, कहने लगे, यार कुछ तो रहम करो। मैंने कहा, भगवान अब कुछ नहीं हो सकता, आप तो फंस गए हो। वैसे गलती आपकी नहीं भगवान राम की है, उन्होंने अपने राज में सबकुछ सही किया, लेकिन आय-जाति के प्रमाण पत्र बनाने का विभाग खोलना भूल गए। ये उसी का नतीजा है, अब तो सब भुगतना ही पड़ेगा। 

उन्होंने कहा, कुछ कह-सुनकर काम चला लो। कह दो कि मैं ये सब नहीं मानता। मैंने कहा, आप अकेले थोड़ी हैं, इतने सारे देवी-देवताओं और महापुरुषों का बंटवारा कर रखा है, आज तक कोई कुछ बोल पाया क्या। अपना असली जाति प्रमाण पत्र लाकर दिखाना होगा, वह आप कर नहीं पाओगे। क्योंकि रिश्वत के बगैर प्रमाण पत्र बनेगा नहीं, आपके पास सिंदूर, गदा और ये लाल झंडी के अलावा कुछ है न ही। दानपात्र में पुजारी हाथ डालने देगा नहीं। इसलिए अब आपका कुछ हो नहीं सकता। 

भगवान को कुछ नहीं सूझा तो वे बात बीच में ही छोडक़र अंतर्धान हो गए। मैंने नजर पलटाई तो देखा सामने एक बोर्ड लगा था हनुमान दलितोत्थन समिति, अगले ही दिन उसके ठीक सामने एक और बोर्ड टंग गया हनुमान जनजाति कल्याण समिति। 


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