देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका का वित्त विभाग खतरे में

By - राकेश पाणिग्राही

महेंद्र कुमार भगवान सिंह राजपूत:- एकमेव चार्टर्ड अकाउंटेंट



तक़रीबन 27 हजार करोड से भी ज्यादा की बजट वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका के रूप में भी जानी जाती है जिस में होने वाले वृत खर्च अथवा उस पर नियंत्रण के लिए लेखा परीक्षक और लेखपाल जैसे महत्वपूर्ण विभाग तो है लेकिन इस विभाग में चार्टर्ड अकाउंटेंट (लेखाकार) सिर्फ एक है।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि विभाग में प्रमुख लेखापाल, उप प्रमुख लेखापाल जैसे विभिन्न पदनाम वाले 1473 अधिकारी और कर्मचारी फिलहाल कार्यरत हैं पर चार्टर्ड अकाउंटेंट सिर्फ एक।

हम आपको बता दें कि इसकी जानकारी खुद बीएमसी ने एक आरटीआई के जरिए अनिल गलगली को दी है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने लेखा परीक्षक विभाग में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी, पूछा था कि उक्त विभाग में कितने अधिकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट है जिसके जवाब में सामान्य प्रशासन के प्रमुख लेखापाल ने बताया कि उप प्रमुख लेखापाल वृत्त के विभाग में चार्टर्ड अकाउंटेंट अर्हता वाले राजपूत महेंद्र कुमार भगवान सिंह वरिष्ठ लेखा परीक्षक एवं लेखा सहायक के रूप में एकमात्र अधिकारी हैं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट पर होती हैं कई सारी अहम् जिम्मेदारियां


देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका 27,000 करोड़ की बजट होने के बावजूद पर्याप्त संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट ना होना देश की जनता के लिए भी चिंताजनक विषय है।

बीएमसी के मुख्य लेखा परीक्षक विभाग में 599 पद है लेकिन इन में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं है। इसके अलावा लेखा परीक्षक का काम बीएमसी  के मुख्य लेखा परीक्षक विभाग में किया जाता है और प्रमुख लेखापाल (वृत्त) यह भी काम कर लेते हैं।

"किसी भी कंपनी या संस्थान की अर्थव्यवस्था को नियंत्रण करने उस से जुड़े सिस्टम का ऑडिट और उसे सेटिसफाइड करने का काम चार्टर्ड अकाउंटेंट के जिम्मे होता है और विभिन्न भुगतान हिसाब-किताब भी चार्टर्ड अकाउंटेंट के जिम्मे होता है। योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट होंगे तो भ्रष्टाचार और अनियमितता की पोल खोल उसी वक्त हो सकती है जिसका फायदा मनपा को हो सकता हैं।" - Pooja Agrahari (CA)

अनिल गलगली ने सीएम को लिखा पत्र


आरटीआई कार्यकर्ता गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिख कर उनका ध्यान आकर्षित किया हैं। उन्होंने लिखा है कि बीएमसी में चार्टर्ड अकाउंटेंट न होना चिंताजनक है, जिसे राज्य सरकार नजरअंदाज कर रही है। मुख्य लेखापरीक्षक की नियुक्ति सरकार करती है। वैसे यह जिम्मेदारी राज्य सरकार ने जिस अधिकारी को सौंपी है, वह चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं हैं।


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