नेहरू ने इस कार्टूनिस्ट से कहा था मुझे बक्श मत देना


प्रधानमंत्री और कार्टूनिस्ट : नेहरू और शंकर 

प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट शंकर द्वारा 1955 में गणतन्त्र दिवस से ठीक तीन दिन पहले बनाए गए इस कार्टून में भारतीय गणतंत्र को एक बच्चे के रूप में जवाहरलाल नेहरू के कंधे पर बैठे हुए दिखाया गया है। नेहरू के साथ चल रहे लोगों में गोविंद वल्लभ पंत, मोरारजी देसाई, यू.एन. धेबर, बिधान चंद्र रॉय, टी.टी. कृष्णमचारी, गुलज़ारी लाल नन्दा, जगजीवन राम, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद आदि को दिखाया गया है। 

शंकर राजनीतिक कार्टूनों के जन्मदाता 

शंकर को हिंदुस्तान में राजनीतिक कार्टूनों को जन्मदाता माना जाता है। केशव शंकर पिल्लै (1902-1989), जिन्हें कार्टून की दुनिया में शंकर के नाम से जाना जाता है, ने हिंदुस्तान के आज़ाद होने के साल भर बाद ही अपनी प्रसिद्ध पत्रिका “शंकर्स वीकली” का प्रकाशन शुरू किया। 

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कार्टूनिस्ट शंकर 
शंकर की यह पत्रिका प्रसिद्ध ब्रिटिश पत्रिका ‘पंच’ की तर्ज़ पर पूरी तरह से कार्टूनों और व्यंग्यात्मक लेखों की पत्रिका थी। शंकर, नेहरू के चहेते कार्टूनिस्ट थे और नेहरू, अक्सर शंकर के कार्टूनों में निशाने पर रहा करते थे। नेहरू ने एक बार शंकर से कहा भी था – “मुझे बख़्शना मत, शंकर!” (Don’t spare me, Shankar!)

नेहरू ने कभी शंकर के कार्टूनों के बारे में लिखा था : 

“एक सच्चा कार्टूनिस्ट सिर्फ हँसने-हँसाने का काम नहीं करता, बल्कि वह किसी घटना के भीतर कहीं गहरे झाँक सकता है। और अपनी कूची से घटना के उस न दिखने वाले पहलू को औरों के सामने कहीं बेहतर ढंग से उजागर कर सकता है। शंकर में यह दुर्लभ प्रतिभा है। जो अन्य देशों की अपेक्षा हिंदुस्तान के कार्टूनिस्टों में बिरले ही दिखाई देती है। किसी के प्रति बैरभाव रखे बिना, शंकर अपने कला-कौशल से सार्वजनिक मंचों पर अक्सर दिखने वाले लोगों की कमियों और उनकी सीमाओं को हमारे सामने रखते हैं। हमें शंकर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। क्योंकि इससे पहले कि हम और अधिक आडंबरपूर्ण या आत्म-केंद्रित हो जाएँ, बेहतर होगा कि शंकर सरीखा कोई शख़्स, हमारे दिखावे और गुमान के इस आवरण को फाड़ कर रख दे।”


आगे चलकर 1982 में जब शंकर ने नेहरू पर बनाए गए अपने व्यंग्य-चित्रों पर आधारित एक संकलन पुस्तक रूप में प्रकाशित की, तो इसका शीर्षक ही था – “Don’t spare me, Shankar!”। यह किताब चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित की गई। उल्लेखनीय है कि चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट की स्थापना भी शंकर ने ही 1957 में की थी।

केरल में पैदा हुए है शंकर 

केरल के कायमकुलम में पैदा हुए शंकर ने बचपन से ही व्यंग्य-चित्र बनाने शुरू किए। शंकर ने ऐसा पहला चित्र स्कूली कक्षा में सोते हुए अपने एक शिक्षक का बनाया था। हालाँकि इस चित्र के लिए शंकर को इनाम मिलने के बजाय, हेडमास्टर की डांट खानी पड़ी थी। 

“शंकर्स वीकली” के प्रकाशन से पूर्व शंकर ‘बॉम्बे क्रॉनिकल’ ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ सरीखे अख़बारों में कार्टूनिस्ट की हैसियत से काम कर चुके थे। “शंकर्स वीकली” से अबू अब्राहम, कुट्टी और रंगा सरीखे बेहतर कार्टूनिस्ट जुड़े रहे।





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