गांगुली को लॉर्ड्स में टी - शर्ट उतारने से सचिन, द्रविड़, लक्ष्मण, कुंबले जैसे खिलाड़ियों ने मना कर दिया था


http://www.hindidakiya.com/
फोटो - भोपाल समाचार 

इस तस्वीर से आप में से ज्यादातर लोग बखूबी परिचित होंगे। इस तस्वीर के पीछे की कहानी से भी थोड़ा सा ही सही लेकिन परिचित ज़रूर होंगे। आज हम आपको इस तस्वीर के पीछे की पूरी कहानी बताने जा रहे हैं।


जी हां, आपने बिल्कुल सही पहचाना। तस्वीर में दिख रहे सख़्स कोई और नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ही हैं। जिन्हें क्रिकेट ग्राउंड से लेकर दर्शक और फैन्स प्यार से 'दादा' कहते थे।

दरअसल ये तस्वीर कई नज़रिए से बहुत खास और यादगार है। खास और यादगार इसलिए नहीं कि किसी खिलाड़ी ने कपड़े उतारे थे। बल्कि इसलिए क्योंकि सौरव गांगुली जैसे संयमित खिलाड़ी ने कपड़े उतारे थे।

हो सकता है कि आज के समय में कपड़े उतार देना कोई नई बात न हो। क्योंकि अब तो फिल्मी ऐक्टर्स-ऐक्ट्रेसेज़ से लेकर खिलाड़ी और नेता पब्लिसिटी बटोरने के लिए जो ना कर दें, कम ही है।

बात 2002 की है। भारत-इंग्लैंड के बीच नेटवेस्ट ट्रॉफी चल रही थी। आख़िरी मैच था। मैच लॉर्ड्स के मैदान में चल रहा था। बैटिंग के लिए इस अनुकूल पिच पर इंग्लैंड ने पहली बैटिंग करते हुए 325 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। भारत को जीत के लिए 326 रन चाहिए थे।

भारत ने सधी हुई शुरुआत की। पहले विकेट के लिए सहवाग (45) और गांगुली (60) ने 106 रन जोड़े। बीच में विकेट भी गिरते गए। बीच में एक बार फिर से भारत की स्थिति थोड़ी सी कमज़ोर हुई। लेकिन इस बीच युवराज-कैफ़ की जानी-मानी जोड़ी ने एक बार फिर से अपना दम दिखाया। मैच अंत तक रोमांचक बना रहा। आख़िरी ओवर तक चला। आख़िरी ओवर में जिताऊ रन तेज़ गेंदबाज ज़हीर ख़ान के बल्ले से निकला। भारत जीत गया।

फिर क्या था। अपने ही देश में 'अंग्रेजों' से हार से बदहज़मी के शिकार दादा ने अंग्रेजों की ज़मीं पर जाकर उन्हें हराया। जीत की खुशी दादा से सम्हल नहीं रही थी।

 सचिनद्रविड़लक्ष्मणकुंबले ने मना किया था 

एक इंटरव्यू में सचिन ने बताया कि जीत की खुशबू नज़दीक पाकर गांगुली ने टीम के 'सभी सदस्यों से' टी-शर्ट उतारकर इंग्लैंड के खिलाड़ियों को दिखाने को कहा था। लेकिन सचिन, द्रविड़, लक्ष्मण, कुंबले जैसे अन्य सीनियर खिलाड़ियों ने कप्तान गांगुली को समझाया। गांगुली एक बार तो सीनियर खिलाड़ियों की बात मान गए। लेकिन मैच जीतते ही खुशी उनसे रोकी नहीं गई। उन्होंने टी-शर्ट उतारकर हवा में स्विंग कर दिया।

गांगुली जैसे खिलाड़ी की इस प्रतिक्रिया ने पूरे विश्व की मीडिया में सुर्ख़ियां बटोरने का काम किया था। दरअसल सौरव गांगुली उस दौर के खिलाड़ी थे, जब क्रिकेट 'जेंटल मेन्स गेम' बोला जाता था। उस पर भी सौरव गांगुली बल्ले से कितने भी आक्रामक थे किंतु स्वभाव से विश्व के सबसे संतुलित और संयमित खिलाडियों/कप्तानों की श्रेणी में गिने जाते थे।

उस दौर में सौरव गांगुली जैसे खिड़ाड़ी का अपनी टी-शर्ट उतार देना विश्व जगत में क्रिकेट खिलाड़ियों और फैन्स से लेकर आईसीसी तक में चर्चा का विषय बन गया था।

बंगाली टाइगर 'दादा' पर किसी ने उंगली नहीं उठाई 

इन सबके बावजूद यह बंगाली टाइगर 'दादा' के उम्दा, सर्वप्रिय और सकारात्मक व्यक्तित्व का ही असर था कि उनपर किसी ने भी पलटकर प्रश्नचिन्ह नहीं उठाए। उनकी आलोचना नहीं हुई। हां, मीडिया वाले कभी-कभार चर्चे होने पर मज़ाकिया और चुटीले अंदाज में ज़रूर पूछ लेते हैं कि ''दादा, उस दिन आपको हो क्या गया था?" फिर गांगुली भी हंसकर पूरी घटना बता डालते हैं।

इस घटना का जिक्र गांगुली ने अपनी आत्मकथा 'A Century is not enough' में किया है। इसमें गांगुली ने पूरी घटना को विस्तार से लिखा है।

गांगुली लिखते हैं, इंग्लैंड भारत में खेलने आया था। आख़िरी मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खला गया। इस मैच में हम इंग्लैंड से हार गए। हमें मैच हराने के बाद इंग्लैंड के जाने माने ऑल राउंडर फ्लिंटॉफ ने टी-शर्ट उतारकर जश्न मनाया था।

दादा को बस यही बात खल गई थी। अपने ही देश में 'अंग्रेजों' से हार उन्हें स्वीकार नहीं थी। वो हार पचा नहीं पा रहे थे। उसी घटना के बाद इंग्लैंड में जीतने पर गांगुली ने ये प्रतिक्रिया दी थी।

हालांकि एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते 'दादा' को आज भी अपनी उस प्रतिक्रिया का मलाल ज़रूर है। कई बार वह खुले मंच से इसके लिए खेद भी प्रकट कर चुके हैं। उनका भी मानना है कि खुशी को दूसरे तरीकों से भी व्यक्त किया जा सकता था। मैंने गलत किया था।

फिलहाल, दादा जैसे जिम्मेदार व्यक्तित्व की ऐसी छोटी-मोटी गलतियां माफ़ की जानी चाहिए। आज भी दादा के प्रति क्रिकेट दर्शकों, उनके फैन्स से लेकर आईसीसी के मन में पूरा सम्मान है।

दादा वो खिलाड़ी थे, जिन्होंने भारतीय टीम को नए सिरे से तराशा। दादा ने टीम को एक नए तरीके से रन चेज़ करना सिखाया। दादा ही थे जिन्होंने टीम को विपरीत स्थितियों में भी जूझकर जीतना सिखाया। दादा के बारे में लिखने के लिए बहुत कुछ है। लेकिन शायद अब यह लेख बहुत लंबा हो चुका है।

दादा को स्वस्थ और प्रशन्न जीवन की ढेरों शुभकामनाओं के साथ लिखना बंद करना चाहूंगा। धन्यवाद।


Comments