मैथिलों को अब कोहबर में बैठ के निर्गुण गाना चाहिए

By - धैर्यकांत

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मुझ पे आरोप लगते रहे है की मेरी भाषा बहुत ख़राब है और मैं मैथिलों को मिथिला में रह कर गरियाता हूँ , लेकिन आप कभी इसके पीछे के गुस्से के कारण पे लॉजिकली बात नहीं करते है या करना नहीं चाहते है. दरभंगा में आपके द्वारा चुना हुआ विधायक – सांसद है , लेकिन वो क्या कर रहा है इसपर आप न सवाल पूछते है और न उसको अकॉउंटेबल बनाने की कोशिश करते है , भर दिन मोदी गांधी कीजिये लेकिन अपने क्षेत्र के मुद्दों पे बात करने का समय मत निकालिये.

बिना किसी भूमिका के , बात पते की

आपके सामने चार कागज़ है , उसके बारे में पढ़िए और समय मिले तो हराही में जाकर समाधी ले लीजिये क्यूंकि आपके पास और कोई विकल्प नहीं है. साहित्य और मिथिला-मैथिलि पे जितना हम्मा हम्मा करना था वो हो गया है , उससे मिलता कुछ नहीं , बस आपको ऐसा लगता है की आपने कुछ उखाड़ लिया है , वैसे उखाड़ा आपने जलकुम्भी भी नहीं है अभी तक.

1. वर्ष 2014 मार्च में दाखिल एक RTI के जवाब में केंद्र सरकार ने ये माना की दरभंगा के पोखरों के विकास के लिए पर्यटन मंत्रालय ने चार करोड़ चौहत्तर लाख पचपन हज़ार की राशि आवंटित की है. मजा आ गया होगा पढ़ के , लगा होगा हराही और गंगासागर तो अब beach बन जाएगा , फिर आप भी वहां चड्डी बनियान में पिकनिक मनाएंगे , रुकिए और आगे पढ़िए.

2. अप्रैल 20 , 2014 को बिहार के पर्यटन मंत्रालय के प्रमुख सचिव ने केंद्र को DPR सौंपी और राशि को पांच करोड़ अठानवे लाख अट्ठत्तर हज़ार तक बढ़ा दिया. आपको लग रहा होगा अब beach के साथ हराही पे क्रूज़ का मजा भी मिलेगा , रुकिए और आगे पढ़िए.

3. 2017 में दैनिक जागरण ने जब इस खबर को छापा तो विधायक, DM से लेकर नगर निगम के मुख्य अभियंता को इस राशि के बारे में कुछ पता ही नहीं था और किसी ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. तीन साल तक किसी को कुछ नहीं पता लेकिन दरभंगा में अफवाह थी की पोखरों के आसपास रेस्टोरेंट बनने वाले है , नौका विहार होगा और भी बहुत कुछ लेकिन हुआ कुछ नहीं.



4. ये कागज़ लेटेस्ट है और इसको पढ़ के दो बात चलेगी आपको पता , एक तो आवंटित राशि में से जो अठानवे लाख रूपए खर्च हुए , वो कहाँ खर्च हुए ? क्यूंकि पोखर पे अब भी सुवर और कुत्तो का ही बसेरा है और दूसरा जो बांकी का पैसा खर्च होना था चार साल पहले वो बिहार सरकार अपने मद से क्यों नहीं खर्च पा रही है ? क्या इस राशि के खर्चने में कोई बड़ा घोटाला हुआ है ? क्या इसपर जांच नहीं होनी चाहिए ?
नितीश कुमार , संजय झा और संजय सराओगी से ये बात पूछी जानी चाहिए की ये लोग मिथिला का अपमान हमेशा क्यों करते है ? क्यों इसको हमेशा विकास से दूर रखा गया है ? झूठ फ़ैलाने में तीनो का कोई सानी नहीं है और इस बार तो कागज़ है प्रत्यक्ष में , जो लोग गुदा रखते है वो ये सवाल पूछे , अगर नहीं पूछ सकते तो घर में कोहबर होगा , जाकर निर्गुण गाइये.


 




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