लाइट वाला मार्कर पेन - Love Story

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फ़ोटो - सीएनएन

"लाइट वाला मार्कर पेन" - Love Story ❤️

तुम्हें याद है तुमने मुझे एक मार्कर पेन दिया था और एक खुद रख लिया था। उस मार्कर पेन में एक लाइट भी लगी हुई थी। मार्कर की ख़ासियत ये थी की मार्कर से कागज पर अगर आप कुछ लिखते हो तो कागज पर लिखा हुआ तब दिखेगा जब आप उस मार्कर पेन की  लाइट से लिखे हुए पन्ने पर रोशनी दोगे वरना किसी को कुछ पता ही नहीं चलेगा कि तुमने कुछ लिखा भी है। 

पेन देते वक्त तुमने कहा था कि इस पेन से मुझे एक ख़त लिखना। तब मैंने ये कहते हुए टाल दिया था कि ये ख़त वगेरा लिखना मेरे बस की बस की बात नहीं है और वैसे भी मैं ख़त लिखूं क्यों क्या मैं कोई दुःखी आशिक हूँ या कोई दुःखी शायर जिसकी महबूबा उसे छोड़ गई हो और उसकी याद में अपने कलम को कागज पर घसीटे जा रहा है और लोगों की वाहवाही लूट रहा है। 

भाई मेरी महबूबा तो मेरे साथ है और मेरे साथ हमेशा रहेगी। मेरे इतने कॉंफिडेंट से तुम खुश तो जरूर होती थी पर साथ ही ये भी कहती की एकाग्र वक़्त का कोई भरोसा नहीं है कभी -  भी कुछ भी हो सकता हैं। तुम्हारे ऐसे कहने पर मैं तुम्हें डांट दिया करता और कहता की खराब वक़्त हमारे लाइफ में कभी नहीं आयेगा और हम हमेशा साथ रहेंगे। पर शायद मैं गलत था मैं ये भूल गया था कि मैं भी एक इंसान हूँ और मेरे जीवन में आम लोगों की जीवन की तरह उतार-चढ़ाव और खराब वक़्त आयेगा। 

कुछ समय बाद वक़्त बदल गया। हमारी लाइफ में भी खराब वक़्त आया लेकिन हम उसका सामना न कर सकें, नतीजन धीरे - धीरे हम एक दूसरे से दूर हो गये। 

अब अकेले में तुम्हारी कहीं हर बात याद आती है। तुम्हारी बातें कहीं मैं भूल न जाऊं इस डर से मैं उसे अब लिख कर रख लेता हूँ। हाँ उसी मार्कर वाले पेन से जो तुमने दिया था और रात में जब सब सो जाते है तो मार्कर की लाइट से उन सारी लिखी गयी बातों को एक बार पढ़ लेता हूँ।

तुम चाहती थी कि मैं तुम्हारे लिए खत लिखूँ तो सुनो हम - दोनों के दूर होने के बाद मैंने तुम्हरी बातों को लिखने से पहले तुम्हारे लिए ख़त लिखे थे। जिसे मैं आज तुम्हारे पते पर पोस्ट कर रहा हूँ। शायद तुम तक मेरा ख़त न पहुँचे क्योंकि तुमको गए काफी वक़्त बीत चुका हैं तुम अब भी वहीं रहती हो या नहीं ये पता नहीं। लेकिन फिर भी अगर गलती से भी तुमको वो ख़त मिल जाये तो उसे कोरा कागज समझ कर फेंक मत देना, एक बार उसको खोल कर वही मार्कर वाली पेन की लाइट से पढ़ना। 

वैसे,अब भी अगर मेरे पास कोई कोरा कागज आ जाता हैं तो एक बार ही सही मैं उसपर मार्कर पेन वाली लाइट जरूर मारता हूँ और पन्ने का कोना - कोना छान मारता हूँ, ताकि मुझसे तुम्हारा कोई ख़त छूट न जाए।

शायद तुम्हारा,
मैं थिंकर



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