संविधान की शपथ से हुई ये शादी लोगों के लिए मिसाल है




संविधान की शपथ लेकर हुई शादी 

टाइटल से आप समझ ही गए होंगे कि यह कोई अनोखी शादी होगी। जी, हां ये अब तक की सबसे अनोखी शादी है। आपने लोगों को कोर्ट मैरिज करते सुना होगा या घर से भागते, लेकिन ऐसा इस शादी में कुछ भी नहीं है. इस शादी में दो लोगों ने अपनी आपसी सहमति से संविधान की शपथ लेकर और  संविधान को साक्षी मानकर एक दूसरे के साथ जीवन भर साथ रहने का वादा किया है। सच में यह अपने आप में सबसे अनोखी शादी है।

23 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ के रायपुर से करीब 150 किलोमीटर दूर रतनपुर के पास लखनीपुर में एक बेहद अनोखी शादी हुई। 


प्रिया पेशे से वकील है और उन्होंने थियटर कलाकार अनुज संग संविधान की शपथ लेकर शादी रचाई। इस शादी की तैयारी, रस्में, बारात और शादी का जश्न सबकुछ दूसरी शादियों से एकदम अलग था।

इस शादी में ज़्यादातर मजदूर, गरीब और जन-आंदोलन से जुड़े लोग ही बाराती के तौर पर शामिल थे और खास बात यह कि बारात रिक्शे पर बड़ी ही धूमधाम से निकली। रात के वक्त जब शादी की यह अनूठी रस्में शुरू हुईं, तो सबकी आंखें खुली की खुली ही रह गईं। प्रियंका और अनुज ने संविधान की शपथ लेकर एक-दूसरे को अपनाया। शपथ के दौरान दूल्हा-दुल्हन ने एक साथ कुछ इस तरह संविधान की किताब में लिखी बातों को दोहराया।

अनुज और प्रिया ने ऐसे लिया शपथ 

शपथ का वीडियो देखिए , लिंक पर क्लिक करें


‘मैं अनुज/प्रिया भारत के संविधान की शपथ लेते हैं कि हम एक दूसरे को हमेशा एक दूसरे की तरह रहने देंगे। हम दोनों कभी भी मतभेद को मनभेद में नहीं बदलेंगे। हम दोनों आजीवन घर के सारे काम आपस में बराबर से बांट लेंगे। कितना भी गुस्सा आए हम दोनों हिंसा से दूर रहेंगे। घर के अंदर या बाहर जातिवाद, अभद्र, महिला विरोधी, वर्ग विरोधी सांप्रदायिक भााषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दुनिया के सारे बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानेंगे। सारे वंचित समाज को अपना परिवार मानेंगे। अपना आदर्श स्थापित कर समाज बदलेंगे। हम भारत के संविधान द्वारा स्थापित मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति ना सिर्फ निष्ठा रखेंगे बल्कि उनको कायम रखने के लिए जीवन समर्पित कर देंगे।’ इस शपथ को लेने के बाद प्रियंका ने इनकलाब जिंदाबाद के नारे भी लगाए। 


संविधान की शपथ से शादी और प्रिया का बयान

प्रिया के अनुसार  हमारे देश और समाज में शादी को लेकर बहुत ही बड़ा हऊआ बनाया गया है। जरूरी नहीं कि शादी करने के लिए बहुत ज़्यादा पैसे  की ज़रूरत है और शादी बहुत ही धूम धाम से हो। जबकि शादी, दो लोगों के वैचारिक मिलन का समारोह है। वहीं रिक्शे पर बारात निकाले जाने को लेकर अनुज ने कहा कि ‘हमने अपनी हैसियत के हिसाब से ही यह शादी की है और हम काफी खुश हैं।’

हमें सामाज में इस तरह की शादी को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि आनेवाली पीढ़ी के लिए हमारा देश ही नहीं हमारा सामाज भी धर्मनिरपेक्ष बना रहे।







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