वो बातें जो अटल जी को दिलों का नेता बनाती है

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वो बातें जो अटल जी को दिलों का नेता बनाती है
दोस्तों का घर आना-जाना लगा रहता है, लेकिन अटल जी के दोस्त उनके घर आने से डरते थे- उसकी वजह थी उनके पिताजी जी का गरम दूध पिलाना.  
26 फरवरी 1970 को इंदिरा ने सदन में एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारतीयता के मुद्दे पर जनसंघ को घेरा था. इंदिरा ने कहा, ‘मैं जनसंघ जैसी पार्टी से पांच मिनट में निपट सकती हूं.’ इंदिरा का ये बयान अटल को अच्छा नहीं लगा. जवाब में अटल बोले ‘प्रधानमंत्री महोदया कहती हैं कि वो जनसंघ से पांच मिनट में निपट सकती हैं. क्या कोई लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री ऐसा बोल सकता है? मैं कहता हूं कि पांच मिनट में आप अपने बाल भी ठीक नहीं कर सकती हैं. फिर हमसे कैसे निपटेंगी!’

25 दिसंबर 1924 को अटल बिहारी ग्वालियर में पैदा हुए. शुरुआती पढ़ाई ग्वालियर में ही हुई. फिर ग्रैजुएशन. अब बारी थी पोस्ट ग्रैजुएशन करने की. ग्वालियर में कोई पोस्ट ग्रैजुएशन कॉलेज नहीं था. एकलौता सहारा था कानपुर जाने का मगर उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वहां जाकर पढ़ सकें. इसमें उनकी मदद की ग्वालियर राज के महाराज जीवाजी राव सिंधिया ने. एडमिशन लिया डीएवी कॉलेज कानपुर में. पॉलिटिकल में एमए किया. इसके बाद लॉ पढ़ने के फैसले के दौरान ही. वहां पहुंच गए पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी. पेशे से टीचर और कवि. ये उनका अधूरा सपना था. लॉ की पढ़ाई करने का. दोनों लोगों का एक ही क्लास में हुआ एडमिशन. दोनों एक ही हॉस्टल में एक ही कमरे में रहने लगे. पिता-पुत्र की जोड़ी कॉलेज में चर्चा का विषय बन गई.

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जो रही सही कसर थी वो पूरी कर दी एक पत्रकार ने. इनकी जोड़ी की खबर छाप दी अखबार ने. सो जो नहीं जानता था. वो भी जान गया. आलम ये था कि अटल के पिता जब क्लास में पहले पहुंज जाते तो मास्टर साहब पूछते. अरे आपके सुपुत्र कहां हैं. तो पिता बोलते – कमरा बंद करके आता होगा. ऐसे ही जब अटल पहले पहुंच जाते तो उनसे यही सवाल पूछा जाता. पर इसी चर्चा और लड़कों के बीच गपशप को देखते हुए दोनों का सेक्शन बदल दिया गया. हालांकि दोनों लोग एक कमरे में रहते. साथ में खाना बनाते. यहीं से अटल को खाना बनाने का शौक लगा जो उनको जीवन भर रहा.

अटल बिहारी ने बताया कि कैसे वो राजीव गांधी की वजह से ज़िंदा बच पाए जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, तब उन्हें किसी तरह मेरी किडनी की समस्या के बारे में पता चल गया था, जिसका इलाज सिर्फ विदेश में हो सकता था. एक दिन उन्होंने मुझे ऑफिस बुलाया और कहा कि वो मुझे उस दल में शामिल कर रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है. राजीव ने उम्मीद जताई कि मैं इस मौके पर अपना इलाज भी करा लूंगा. तब मैं न्यूयॉर्क गया और आज मेरे ज़िंदा होने का एक कारण ये भी है.’




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