सवर्ण आरक्षण एक सिक्का है जिसके चिट और पट में भाजपा है




बीजेपी ने स्वर्ण आरक्षण देकर उच्च जाति के वोट पक्के कर लिए है

2019 के लोकसभा चुनाव आने वाले है। सभी पॉलिटिकल पार्टियाँ चुनाव जीतने के लिए अपने - अपने दाव पेंच खेल रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता है।

सत्ताधारी पार्टी बीजेपी भी अपने विरोधियों से पीछे नहीं रहना चाहती। 2018 में देश के 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में हार मिलने के बाद पार्टी का मनोबल कुछ स्तर तक कम हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों में बीजेपी की चुनाव हारने की मुख्य वजह पार्टी से नाराज चल रहे उच्च जाति के लोग है।

बीजेपी ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 फीसदी का आरक्षण देने की घोषणा कर दी है। ताकि आनेवाले आगामी चुनाव में पार्टी को सवर्णों की नाराजगी का सामना न करना पड़े।

सवर्ण आरक्षण बिल राज्य सभा में पास हो न हो फिर भी भजपा को सवर्ण वोट मिलेगा

सवर्ण आरक्षण देकर भाजपा ने बड़ा ट्रम्पकार्ड खेला है। भजपा से खफा सवर्ण राम मंदिर के निर्माण को लेकर सरकार का विरोध कर रहे थे। लेकिन सवर्ण आरक्षण के ऐलान के बाद से ही लोगों के जबान पर राम मंदिर के निर्माण की जगह सवर्ण आरक्षण की ही बातें आ रही है। भजपा के इस दाव को आप उसकी मजबूत राजनैतिक विश्लेषण ही कह सकते है।

भाजपा लोकसभा में मजबूत है इसलिए लोकसभा में सवर्ण आरक्षण बिल पास हो गया। लेकिन राज्यसभा में भाजपा कमजोर है।

ऐसे में राज्यसभा में सवर्ण आरक्षण बिल का पास होना मुश्किल लग रहा है।

लेकिन भाजपा ने अपना काम कर दिया है। अब सवर्ण ये नहीं कह सकेंगे की बीजेपी ने उनके लिए कुछ काम नहीं किया हैं।

सवर्ण बिल न पास होने पर बीजेपी सवर्णो से ये कह सकेगी की विरोधी पार्टी उनका भला नहीं चाहती इसलिए वो ये बिल पास नहीं होने दे रहे है। इसके बाद सवर्ण भी विरोधी पार्टी के खिलाफ हो जायेंगे और चुनाव में भाजपा को वोट देंगे।

सरल भाषा में कहा जाए तो सवर्ण आरक्षण देकर भाजपा ने चिट और पट दोनों अपने नाम कर लिया है।








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