कविता - वसंत बारह महीने है




वसंत बारह महीने है


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वसंत अमरूद की डाल पर झूमता है
केले की पत्तियों पर पसर कर गुनगुनी धूप का आनंद लेता है
आम की मंजरिओं में पड़ा रहता है 
मदमस्त भंवरे की तरह
शहर में
कवियों ने हल्ला मचा रखा है कि
वसंत आ गया
वसंत आ गया है 
रुको भाई 
मेरी भी कोई सुनो,
कांचनार खिल उठा है
शिरीष जवान हो गया है पर खिला नहीं है
परिजात को आलस्य ने घेर रखा है
कदम की पुलकियों में 
कोयल की कूक का गूंजना तेज हो गया है। 
सरसों का लह_लहा के फूलना 
आपको ललचा देगा, 
कवियों ने हल्ला मचा रखा है कि
वसंत आ गया है।



ठीक है,

गेहूं की बालियां अब बेजोड़ होने लगी हैं
बंगले की बालकनी में गुलाब कन्नौजी फिजा बनाए हुए है, नारियल के पत्ते की चीरी हुई शिराएं आकंठ आनंद में डूबी है।

अब भंवरों की शरारती बढ़ गई है, 

तो गमले में लगी नागफनी के भी कांटे निकल आए हैं

मेरे हिसाब से देखिए
वसंत धीरे धीरे कौस्तुभमस्त होकर आता है 
अभी जामुन का फूलना शेष है 
जामुन का तो मौसम आषाढ़ में आता है
आंवले में कोशें फूट रहे हैं 
अमरूद, अमरूद भरे भादो, सूखे सावन
सब में निराला रहता है
इधर, शहरों में कवियों ने हल्ला मचा रखा है कि
वसंत आ गया है
वसंत है, 
वसंत बारह महीने है 
आपको फुर्सत कब होती है
महसूस करने कि
कहीं आप भी तो उस आलसी भंवरों की तरह नहीं 
जो सिर्फ वसंत में ही आलस्य त्यागता है।


- कवि- पवन कुमार मौर्य

जन्मतिथि- 01 जून, 1993
शिक्षा– स्नातक भूगोल (ऑनर्स) (बीएचयू, बनारस) एमए (जनसंचार) एमसीयू, भोपाल.

प्रकाशन-
जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला, सुबह सवेरे सहित कई प्रमुख समाचार पत्रों में समसामयिक मसले पर सैकड़ों आलेख, टिप्पणी और पत्र प्रकाशित। डिजिटल साहित्यिक मंच- प्रतिलीपी, हिंदी डाकिया, कंटेंट मोहल्ला सहित कई मंचों पर कविता, कहानियां, यात्रा-वृतांत आदि प्रकाशित. 
पेशा- दिल्ली में पत्रकारिता

वर्तमान पता- 
फ्लैट नं.-677, वैशाली, सेक्टर-2
गाजियाबाद

स्थाई पता-
जन्म- बनारस, अब जिला- चंदौली
मानिकपुर, पोस्ट- नौबतपुर, थाना-सैयदराजा
पिन- 232110
सम्पर्क सूत्र- 9667927643

Email- mauryapavan563@gmail.com





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