देश की सुरक्षा गई भाड़ में, दो करोड़ में पटे एफडीए अधिकारी और मंत्री


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मुंबई के दैनिक जनस्वाभिमान में छपी इस खबर को आपको भी पढ़ना चाहिए। बता दें कि इस खबर को सबसे पहले जनस्वाभिमान ने ही प्रकशित की है। अब पढ़िए पूरी खबर।

देश की सुरक्षा गई भाड़ में, दो करोड़ में पटे एफडीए अधिकारी और मंत्री, नहीं होगी दवा डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ कार्रवाई

देश की सुरक्षा और कानून गए भाड़ में। नेवी और डिफेंस में आपूर्ति होनेवाली दवाइयां डिस्ट्रीब्यूट्स करनेवाले डिस्ट्रीब्यूटर्स पर अब अन्न अवं औषधि प्रशासन (एफडीए) कोई कार्रवाई नहीं करेगा। शर्मनाक है कि एफडीए अधिकारी कहते हैं कि वे किस सेक्शन के तहत इन पर कार्रवाई करें, ये उन्हें मालूम नहीं।  इधर एफडीए का एक इमानदार सूत्र बताता है कि एफडीए अधिकारियों और दो मंत्रियों के ओएसडी को दो करोड़ सेक्शन पहुंचने वाला है इसलिए उन्हें कानूनी सेक्शन समझ में नहीं आ रहा है। 

बता दें कि जन स्वाभिमान ने इस बाबत अब तक तीन दफा खबर प्रकाशित की कि एफडीए की इंटेलीजेंस विंग ने भायखला के निवान फार्मास्युटिकल्स के यहां छापा मारकर 18 लाख रुपये मूल्य की सीटाग्लिप्टिन फॉस्फेट टैबलेट्स और विल्डाग्लिप्टिन टैबलेट्स बरामद की थी। यहां से मिली जानकारी के आधार पर एफडीए ने मुलुंड के सेफलाइफ इंटरप्राइजेस (निदेशक ध्रुव मेहता और दीपेश गाला), तलोजा के मेडलाइफ इंटरनेशनल, सानपाड़ा के श्री समर्थ डिस्ट्रीब्यूटर्स, घाटकोपर के पी. विश्राम, विक्रोली के विधि डिस्ट्रीब्यूटर्स, मस्जिद बन्दर के सीके रेमेडीज, शिवड़ी के ग्रीन ऐपल, एमएसडी और नोवार्टिस वितरकों के यहां छापे मारे।

यहां से भी बड़ी मात्रा में सिर्फ डिफेन्स और नेवी के लिए आपूर्ति की जानेवाली दवाइयां बरामद हुईं। शुरू में एफडीए यह कहकर एफआईआर करने से कतरा रही थी कि सब पर एक साथ एफआईआर होगी। पंचनामा हो गया है। अभी से करने पर दवा वितरक सतर्क हो जायेंगे। लेकिन कहानी कुछ और थी। 

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शुक्रवार को एफडीए सूत्र ने जन स्वाभिमान को बताया कि चूंकि एक राज्यमंत्री एक बहुत बड़े आॅनलाइन दवा वितरक कंपनी में भागीदार है तो उसके ओएसडी ने कई दफा फोन कर एफडीए अधिकारियों पर दबाव बनाया कि मंत्री जी चाहते हैं कि बड़ी कार्रवाई न हो। एक दूसरे कैबिनेट मंत्री के ओएसडी ने भी इसी तरह का प्रेशर बनाया। दोनों ओएसडी के नाम जन स्वाभिमान के पास हैं। 

एफडीए सूत्र ने एक नयी कहानी भी बताई। उसका कहना है कि कोई मेहता है जो राज्यमंत्री का पार्टनर है और वह दवा वितरकों के एसोसिएशन में पदाधिकारी भी है। पहले तो इस मेहता के इजाजत बगैर कोई भी दवा वितरक या मेडिकल स्टोर्स वाला मुंबई में धंधा नहीं कर सकता। दवा बाजार में उसकी ही मोनोपोली चलती है जैसे ठाणे जिले में किसी अप्पा शिंदे की।
  
इस मेहता ने अब दवा वितरकों को बचाने का ठेका लिया है। उसने एक एसोसिएशन के जरिये दवा वितरकों से डेढ़ से दो करोड़ रुपये इकट्ठा किये हैं। इनमें से कुछ वह एफडीए अधिकारियों को देगा और कुछ दोनों ओएसडी को। सूत्र ये भी बताते हैं कि इसी मेहता ने ही भायखला के निवान फार्मास्युटिकल्स के यहाँ डिफेन्स और नेवी दवाइयों वाली टिप दी थी और अब खुद मामला सेटल करवाने में लगा है। वह अपनी इस योजना में लगभग सफल भी हो गया है। 

एक नई बात जन स्वाभिमान को मालूम पड़ी कि डिफेन्स का एक अधिकारी एफडीए अधिकारी से मिलकर गया। डिटेल्स लेने के बाद वह यह कहकर गया कि इससे ज्यादा भ्रष्टाचार तो नेवी और डिफेन्स में है। हे राम !!







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