उत्तर भारतीय युवा परिवर्तन मंच ने महाराष्ट्र के 100 लोगों को घुमाया प्रयागराज औऱ नहलाया कुंभ



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  • लोगों ने विश्व के सबसे बड़े मेले में घुमने के बाद कहा “प्रयागराज विश्व का मस्तक है और संगम उसका चंदन”
देश में उत्तर भारतियों की छवि सुधारने और सास्कृतिक संबधो को मजबूत करने के लिए बनाई गई संस्था उत्तर भारतीय युवा परिवर्तन मंच ने अपने पहले कार्यक्रम के दौरान ही लोगो का दिल जीत लिया।

विश्व के सबसे बडे मेले के तौर पर जाने वाले कुंभ को दिखाने के लिए उत्तर भारतीय युवा परिवर्तन मंच ने मुंबई – ठाणे, पुणे सहित अन्य जगहो से कुंभ स्नान और सांस्कृतिक विरासत को दिखाने के लिए करीब 100 लोगों को प्रयागराज लेकर गई। केवल उत्तर भारत के ही नहीं देश के अन्य सभी जगहों के लोगों ने इस प्रयास में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए करीब 100 लोगों ने अपना नामिनेशन फाइल किया जिसमें शुरुआत दौर में आए सिर्फ 80 नामों को चुना गया और उनके आने - जाने रहने खाने पीने की सारी व्यवस्था UBYPM  में महज कुछ रजिस्ट्रेशन फीस लेकर की। बाकी बचे 20 लोगों को फ्लाइट के जरिए कुंभ मेले का दर्शन करवाया गया।

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लोगों के मन में कुंभ को लेकर उत्साह के साथ-साथ काफी आशंकाए थी लेकिन उत्तर भारतीय युवा परिवर्तन मंच की कोर टीम और उससे जुडे सभी लोगो ने पहले सांस्कृतिक संबन्धो के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए पूरी मेहनत की। जिसके बाद वहां से लौटे सभी लोगो UBYPM की तारीफ की और अगले किसी भी इस तरह के प्रोग्राम में बढचढ कर हिस्सा लेने के लिए पहले ही अपनी हां कर दी। इस प्रोग्राम को बनाने के बाद सभी लोगों ने अपने-अपने तरीके से मेहनत की जिसमें प्रमुख तौर पर सुनीता सिंह, श्वेता शालिनी, अभिषेक पाण्डेय, प्रदीप तिवारी, सुरेश शाहू और प्रवीन मेमन प्रमुख तौर पर लगे रहे। इन लोगो को ले जाने के लिए विशेष तौर पर रेलवे में एक एसी कोच लगाया गया जो सभी 80 लोगों के लिए आरक्षित रहा।

गौरतलब है कि पूरे देश में उत्तर भारत की छवि सुधारने के लिए औऱ उनका सम्मान बढाने के लिए श्वेता शालिनी, अभिषेक पाण्डेय, आशुतोष गुप्ता, सुनीता सिंह, प्रदीप तिवारी, सुरेश शाहू, रितुकांत ओझा ने एक संकल्प लिया कि आने वाले समय में उत्तर भारतियो की छवि पूरे देश में सुधारी जाए और इसके लिए उत्तर भारत की सांस्कृतिक धरोहर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी जिसके बाद सांस्कृतिक आदान - प्रदान के कार्यक्रम पर जोर दिया जाने लगा। इस संस्था का आधिकारिक उद्धाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ  था।












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