एसीपी राजेन्द्र त्रिवेदी ने देवेन भारती, किरण चव्हाण, एन. अम्बिका के खिलाफ फाइल की पिटीशन

By - डाकिया जन स्वाभिमान


जब पैदा हुई पुलिस तो खुश हुआ इब्लिश!
कि अब हम भी साहिब-ए- औलाद हो गए!!

  • अर्थात जब पुलिस पैदा हुई यानि जब पुलिस विभाग का गठन हुआ यानि जब पुलिस विभाग का निर्माण हुआ, तब इब्लिश यानि शैतान बहुत खुश हुआ। उसका कहना था कि अब वह भी बाल-बच्चे वाला हो गया है। अब उसका वारिसदार हो गया है।’ 
कभी, किसी कारणवश आपको मुंबई के किसी भी पुलिस स्टेशन में जाना पड़ा हो, किसी कारण पुलिसवाले से आपका साबका पड़ गया हो तो लगभग ऐसी ही (साहिब-ए औलाद वाली) राय प्रत्येक मुंबईकर की हो सकती है। हद/ आश्चर्य तो ये है कि ऐसी ही समानांतर राय वर्तमान में मुंबई पुलिस में ही कार्यरत सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) राजेंद्र त्रिवेदी की भी है। त्रिवेदी की सिर्फ राय ही नहीं है उन्होंने सबूत भी प्रस्तुत किये हैं।

मुंबई पुलिस के सशस्त्र बल -5 में बतौर एसीपी कार्यरत राजेंद्र विश्वनाथ त्रिवेदी ने अपने ही डिपार्टमेंट यानि मुंबई पुलिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में पिटीशन (नंबर -290/2019) फाइल की है। इसके पहले त्रिवेदी सायन डिवीजन के एसीपी और उसके पहले शिवड़ी पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक रह चुके हैं।

पिटीशन का सारांश ये है कि पुलिस अधिकारी /कर्मचारी अपराध की धाराएं कम करने, आरोपी को समय पर गिरफ्तार न करने, पुलिस स्टेशन की हद में अपराध न भी हुआ हो तो योजनाबद्ध तरीके से उसे अपने अधिकार क्षेत्र में दिखाने, नोटबंदी के दौरान बेनामी कारोबार और काला पैसा वसूल करने के लिए फर्जी एफआईआर दर्ज करने, घर/दुकान खाली कराकर देने, पैसा वसूल करने के लिए फर्जी एफआईआर दर्ज करने, पुलिस थाने से फाइल व सम्बंधित पेपर गायब करने और उसके बदले फर्जी पेपर तैयार करने, बड़े आरोपियों को गिरफ्तार करने में जानबूझ कर देरी करने और गिरफ्तार कर भी लिया है तो दबाव में उसे छोड़ देने जैसे कामों में मशगूल हैं।


समय-समय पर त्रिवेदी अपने उच्चाधिकारियों को लिखित में इसकी जानकारी देकर इंक्वायरी की मांग करते रहे। लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो हतप्रभ त्रिवेदी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पिटीशन दायर कर दी।

पिटीशन में त्रिवेदी ने महाराष्ट्र सरकार, मुख्य सचिव (गृह), पुलिस आयुक्त, देवेन भारती, किरण चव्हाण तथा एन. अम्बिका को पार्टी बनाया है। देवेन भारती इस वक्त संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व व्यवस्था), एन. अम्बिका मुख्यालय-2 की उपायुक्त हैं तो किरण चव्हाण परिमंडल-8 के उपायुक्त हैं।

कहानी तब की है जब किरण चव्हाण बन्दर-परिमंडल के उपायुक्त और एन. अम्बिका परिमंडल-4 की उपायुक्त थीं। एन. अम्बिका और किरण चव्हाण से आप धीरे-धीरे रूबरू होंगे लेकिन देवेन भारती तो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। माशाअल्लाह हैं।

त्रिवेदी ने न्यायालय से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 166, 166-ए, 166-बी, 167, 192, 195-ए, 201, 202, 203, 204, 217, 405, 420 आर/डब्ल्यू 34 के तहत मामला दर्ज कर सीआईडी, सीबीआई या किसी स्वतंत्र/निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराएं।

पिटीशन की प्रति जन स्वाभिमान के पास मौजूद है।
इस सन्दर्भ में जब इस संवाददाता ने राजेंद्र त्रिवेदी से संपर्क किया तो उन्होंने पिटीशन फाइल करने की बात कबूल की लेकिन विस्तार में बताने से यह कहकर इंकार कर दिया कि मामला न्यायालय में
विचाराधीन है।


साभार - जन स्वाभिमान अखबार यह मुंबई से छपने वाला एक दैनिक अखबार है। 









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