2019 का चुनाव खुलेआम हिंदू-मुसलमान करने वाले नेताओं के लिए जाना जाएगा

By - डाकिया चमन

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2019 का चुनाव खुलेआम हिंदू-मुसलमान करने वाले नेताओं के लिए जाना जाएगा. 

पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है. देश के बड़े नेताओं के कुछ बयान देखिए- जो उन्होंने हजारों लोगों की भीड़ में रैली को संबोधित करते हुए दिए हैं.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान- जिस सीट पर देश का बहुसंख्यक अल्पसंख्यक है वहां कांग्रेस के नामदार चुनाव लड़ रहे हैं.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का बयान- एनआरसी लागू की जाएगी और हिंदू, बौद्ध और सिख को छोड़कर सभी को भगाया जाएगा.

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान- अगर उनके पास अली हैं, तो मेरे पास बजरंगबली हैं.

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का बयान- मुसलमानों जान लो अगर मुझे वोट नहीं दिया तो मेरे पास काम के लिए मत आना.

बीजेपी सांसद साक्षी महाराज का बयान- साधु हूं, मुझे वोट नहीं दिया तो श्राप दे दूंगा. 

बीएसपी सुप्रीमो मायावती का बयान- मुसलमान अपना वोट बंटने ना दें. गठबंधन को ही वोट दें. 

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र. 90 करोड़ रजिस्टर्ड मतदाता. अरबो रूपयों की खपत. पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल.

सुरक्षाबलों से लेकर स्कूल के टीचर तक की ड्यूटी. इसके बाद ऐसे बयानों और मुद्दों के आधार पर हम सरकार चुनेंगे ?

ऐसा तो 1952 में भी नहीं हुआ था जब हमारी साक्षरता दर बहुत कम थी. हम नये लोकतंत्र थे. चुनाव में वोट देना सीख रहे थे.

लोकतंत्र की रक्षा हर वक्त करनी पड़ती है, करनी चाहिए. नहीं तो 'शेर' की खाल के पीछे छिपकर 'सियार' अच्छे खासे लोकतंत्र को 'बनाना रिपब्लिक' बना जाते हैं.

संविधान बनाते वक्त कहा गया था कि राजनीति को धर्म से अलग रखा जाएगा.

आज धर्म और राजनीति का ऐसा कॉकटेल बना है कि पूरा देश नशे में है.

यकीन करो, ये बहुत खतरनाक है. किसी भी देश की राजनीति में जब धर्म घुस जाता है तो हालात बिगड़ने लगते हैं.






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