उत्तर भारतीयों के लिए शिवसेना का गमछा प्रेम

By - हिंदी डाकिया


इन दिनों शिवसेना गमछे की सियासत कर रही है आप सुनकर चौंक गए होंगे लेकिन यह बात सही है उत्तर भारतीयों के कंधे पर रखा जाने वाला गमछा इन दिनों शिवसैनिकों कि कंधे पर दिखाई पड़ रहा है।

शिवसेना को चुनाव के ठीक पहले 4000000 उत्तर भारतीयों को देखते हुए कहीं न कहीं उत्तर भारतीय प्रेम जाग उठा और कजरी जैसे प्रयोजनों के जरिए उत्तर भारतीयों को भीड़ इकट्ठा कर उन्हें शिवसेना के साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है।

जिस तरीके से बीजेपी और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी मची है शिवसेना को लगता है कि आने वाले समय में अगर बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं हुआ तो 4000000 उत्तर भारतीय एक अहम भूमिका निभाएंगे शायद यही वजह है कि उन 40 लाख उत्तर भारतीयों को देखते हुए शिवसेना ने कजरी जैसे उत्तर भारतीय कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं।


मुंबई सहित महाराष्ट्र में रहने वाले उत्तर भारतीयों में आदित्य संख्या पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं यही वजह है कि शिवसेना ने कजरी जैसे प्रायोजन की जिम्मेदारी आदित्य ठाकरे के ग्रुप में जुड़े हैं।

उत्तर भारतीय नेता आनंद दुबे को दी इस तरीके के उत्तर भारतीय प्रोग्राम को आयोजित करने वाले आनंद दुबे की मानें तो जिस दिन उन्होंने कांग्रेस छोड़ शिव सेना ज्वाइन की थी।

शिवसेना प्रमुख ने उत्तर भारतीयों को जोड़ने की जिम्मेदारी ली थी और उस जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने कजरी सहित तमाम छोटे-छोटे नॉर्थ इंडियंस कार्यक्रम शुरू किए जिसका रिस्पांस भी मिल रहा है और उत्तर भारतीय लोग धीरे-धीरे शिवसेना के साथ जुड़ रहे हैं यानी जो उत्तर भारतीय कभी भैया और बिहारी के नाम से जाने थे। अभी वही उत्तर भारतीय अचानक वोट बैंक के कारण पूजनीय हो गए हैं।

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